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Showing posts from June, 2020

मन

मन धुंद वाऱ्या सवे उडते क्षितिजावर मन पाखरू होऊन देते नभास अलिगण पाहण्या मनाचे चाळे जीव होतो आतुर नकळत तू माझ्या अवती भासतो पाहुनी मग मला गाली हसतो कधी कळणार मी तुला याची वाट पाहतो -kitkat

मुक्कदर

मुक्कदर की लकीरोको हम खुद ही मिटा बैठे है ढुढने निकले थे उजाला पर खुद ही अंधेरा कर बैठे है मानते है गलतीया की है हमने पर संभलना भी खुदसे हि सिखा है जिंदगी के रास्तो पर मूडना भी खुद ही से सिखा है मानता हु रास्ते मुश्कील है पर संभल जायेगे हम खुद ही खुद को संभलं लेंगे हम -kitkat